लोकसभा चुनाव: डिजिटल प्रचार में बीजेपी की रणनीति पर हैरान कर देने वाली रिपोर्ट

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लोकसभा चुनाव: डिजिटल प्रचार में बीजेपी की रणनीति पर हैरान कर देने वाली रिपोर्ट

 


लोकसभा चुनाव 2024... अगर माहौल को देखें तो ये साफ लग रहा है कि ये भारत के चुनावी इतिहास का सबसे नीरस इलेक्शन है. याद करिए 90 का वो दशक जब चुनाव में होली के त्योहार से भी ज्यादा रंगबिरंगा होता था.


लाउडस्पीकरों का शोर, बैनर और पोस्टरों से पटी हर दीवार और रैलियों का उन्माद... आज जनसभाएं हो रही हैं लेकिन चौक-चौराहों पर हो रही बहस में उतनी गर्माहट नहीं है. चुनाव से जुड़ीं खबरों पर भी लोगों की रुचि कम है.


तो क्या आप इस बात को मानते हैं कि चुनाव प्रचार अब नहीं हो रहा है या फिर पहले की तरह उतना पैसा नहीं बहाया जा रहा है. ऐसा बिल्कुल नहीं है. चुनाव प्रचार में पैसा डिजिटल एडवरटाइजिंग में खर्च हो रहा है और प्रचार चौक-चौराहों, सड़कों से उठकर सीधे लोगों के मोबाइल में पहुंच रहा है.


पहले चुनाव प्रचार के घंटे तय होते थे. रात को 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर नहीं बजाया जा सकता था. डिजिटल विज्ञापनों के जरिए 24 घंटे प्रचार हो रहा है. जिन लोगों को रात में 12 बजे के बाद भी मोबाइल देखने की आदत है वो भी इस प्रचार को देख रहे है.


इस रिपोर्ट में हम जानेंगे डिजिटल विज्ञापन के दौर में किस पार्टी की क्या रणनीति है और कौन, कहां, कितना पैसा खर्च रहा है.


डिजिटल कैंपेनिंग की पूरी रिपोर्ट


1. बीजेपी के टारगेट पर आंध्र और ओडिशा जैसे राज्य

सीएसडीएस के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी के टारगेट पर आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्य हैं. आंध्र पर पार्टी ने अपने रिसोर्स का 50 प्रतिशत खर्च किया है, जबकि ओडिशा में 39 प्रतिशत रिसोर्स खर्च किया गया है. 


आंध्र में लोकसभा की कुल 25 और ओडिशा में 21 सीटें हैं. 2019 में आंध्र प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी. ओडिशा में पार्टी ने 8 सीटों पर जीत हासिल की थी.


बीजेपी आंध्र में टीडीपी और पवन कल्याण की पार्टी के साथ गठबंधन में है और 6 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. ओडिशा में पार्टी सभी सीटों पर अकेले मैदान में है. पार्टी को दोनों जगहों पर इस बार बढ़त की उम्मीद है. 


इसके अलावभारतीय जनता पार्टी ने 11 प्रतिशत रिसोर्स अभी तक हिंदी बेल्ट के राज्यों में खर्च किया है. 


2. बीजेपी का लोकल और कांग्रेस का नेशनल इश्यू पर फोकस

भारतीय जनता पार्टी डिजिटल कैंपेनिंग के जरिए लोकल इश्यू पर ज्यादा फोकस कर रही है. वहीं मुख्य विपक्षी कांग्रेस का फोकस नेशनल इश्यू पर ज्यादा है. 


सीएसडीएस के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी ने लोकल इश्यू पर 52 प्रतिशत रिसोर्स खर्च किया है. 48 प्रतिशत रिसोर्स का खर्च नेशनल इश्यू पर किया गया है. बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस ने नेशनल इश्यू पर 86 प्रतिशत और लोकल इश्यू पर 14 प्रतिशत रिसोर्स खर्च किया है. 


बीजेपी ने लोकल इश्यू में प्रमुख रूप से पार्टी के फंक्शनरी, पंचायत और विधानसभा स्तर के मुद्दों को साधा है. वहीं नेशनल इश्यू के तहत पार्टी ने मोदी की गारंटी पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया. 


कांग्रेस ने नेशनल इश्यू के तहत 19 प्रतिशत रिसोर्स का खर्च पार्टी के मेनिफेस्टो पर किया है. पार्टी ने 15 प्रतिशत रिसोर्स सत्तारूढ़ पार्टियों के बारे में बताने के लिए खर्च किया है.


बीजेपी ने 75 प्रतिशत सकारात्मक और 25 प्रतिशत नकारात्मक पोस्ट किया है. कांग्रेस की ओर से 23 प्रतिशत सकारात्मक और 75 प्रतिशत नकारात्मक पोस्ट किया गया है.


3. 10 हजार से कम के एड पर ज्यादा खर्च कर रही बीजेपी

बीजेपी 10 हजार रुपये से कम के एड पर ज्यादा खर्च कर रही है. पार्टी ने आंध्र प्रदेश में 80 प्रतिशत रिसोर्स 10 हजार से कम के एड पर खर्च किए हैं. ओडिशा में यह आंकड़ा 86 प्रतिशत का और बाकी राज्यों में 55 प्रतिशत का है.


पार्टी ने 10 से 50 हजार के एड पर आंध्र प्रदेश में 16 प्रतिशत, ओडिशा में 10 प्रतिशत और बाकी राज्यों में 25 प्रतिशत खर्च किए हैं. 50 हजार से ऊपर के एड पर पार्टी ने आंध्र-ओडिशा में 4-4 और बाकी राज्यों में 19 प्रतिशत रिसोर्स खर्च किए हैं.


दूसरी तरफ विपक्षी कांग्रेस ने अपना सारा रिसोर्स 50 हजार से ऊपर के डिजिटल एड में खर्च किए हैं. भारतीय जनता पार्टी ने डिजिटल एड में इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों को तरजीह दी है. कांग्रेस ने मेनिफेस्टो पर ज्यादा फोकस किया है. 


4. किस हैशटैग पर ज्यादा फोकस कर रही कांग्रेस-बीजेपी

कांग्रेस इस चुनाव में 4 हैशटैग तो बीजेपी 7 हैशटैग पर मुख्य रूप से फोकस कर रही है. सीएसडीएस के मुताबिक कांग्रेस भारत भरोसा, युवा न्याय, पहली नौकरी पक्की और युवा रौशनी को ज्यादा ट्रेंड करवा रही है. 


एजेंसी के मुताबिक कांग्रेस इन हैशटैग के जरिए युवाओं और बेरोजगारों को साधना चाहती है. हाल ही में सीएसडीएस के एक सर्वे में 27 प्रतिशत लोगों ने बेरोजगारी को प्रमुख मुद्दा बताया है. 23 प्रतिशत लोगों ने महंगाई के नाम पर वोट करने की बात कही है.


बीजेपी ने बीजेपी फॉर डेवलपमेंट और मोदी के परिवार जैसे हैशटैग पर ज्यादा फोकस किया है. इसके अलावा फिर एक बार मोदी सरकार और अबकी बार 400 पार हैशटैग को पार्टी ज्यादा ट्रेंड करवा रही है. 


बीजेपी मोदी की गारंटी को भी डिजिटल कैंपेनिंग के जरिए भुनाने की कोशिश कर रही है. 


5. बीजेपी इमेज के जरिए तो कांग्रेस वीडियो दिखाकर कर रही ज्यादा खर्च

डिजिटल कैंपेनिंग में बीजेपी इमेज फॉर्मेट तो कांग्रेस वीडियो फॉर्मेट पर ज्यादा खर्च कर रही है. सीएसडीएस के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी ने 94 प्रतिशत पैसे इमेज फॉर्मेट के विज्ञापनों पर खर्च किए हैं.


पार्टी ने इमेज फॉर्मेट के इस विज्ञापन में इंफ्रास्ट्रक्चर और वेलफेयर स्कीम के मुद्दे को सबसे ज्यादा उठाया है. 


बीजेपी ने वीडियो फॉर्मेट में 6 प्रतिशत रिसोर्स खर्च किए हैं. वीडियो फॉर्मेट के कुल रिसोर्स में से 47 प्रतिशत पैसे इंफ्रास्ट्रक्चर और 12 प्रतिशत पैसे एजुकेशन पर खर्च किए गए हैं.


कांग्रेस ने वीडियो फॉर्मेट में सारे पैसे खर्च किए हैं. पार्टी ने 60 प्रतिशत रिसोर्स रोजगार, 30 प्रतिशत जॉब सिक्योरिटी पर खर्च किया है.

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