वर्षों से अधूरा है अरमान नहीं हुआ अब तक रजौली के धनार्जय नदी पर पुल का निर्माण

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वर्षों से अधूरा है अरमान नहीं हुआ अब तक रजौली के धनार्जय नदी पर पुल का निर्माण





चुनाव जीतने के बाद अब तक आश्वासन ही देते रहे नवादा के सांसद 

भाजपा सांसद भोला सिंह के समय से ही पुल निर्माण होने के उम्मीद में टकटकी लगाए हैं क्षेत्र के मतदाता

हाल के 15 वर्षों के कार्यकाल में नवादा लोकसभा से दो बार भाजपा तो एक बार लोजपा के रहे हैं सांसद

प्रखंड संवाददाता,रजौली (नवादा) 

वर्षों से रजौली के नीचे बाजार स्थित राज शिवाला के पास से डीह रजौली गांव को जोड़ने वाला धनार्जय नदी पर अब तक पुल का निर्माण नहीं होने से लोगों का वर्षों का अरमान अधूरा है। चुनाव जीतने के बाद से अब तक नवादा के सांसद मतदाताओं को केवल आश्वासन ही देते रहे हैं। लेकिन अब तक पुल का निर्माण नहीं करा सके हैं। धनार्जय नदी पर बनने वाले इस पुल से नदी के उस पार के दर्जनों गांव के हजारों लोग व किसान लाभान्वित होंगे। लेकिन ना तो प्रशासनिक स्तर पर और ना ही जनप्रतिनिधि के स्तर पर ही इस दिशा में कोई कारगर प्रयास हुए हैं।

वर्ष 2009 में नवादा लोकसभा से बने भाजपा सांसद भोला सिंह के समय से ही इस क्षेत्र के मतदाता पुल निर्माण होने की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठे हैं। बावजूद इस धनार्जय नदी पर अब तक पुल का निर्माण नहीं हुआ है।

हाल के 15 वर्षों के कार्यकाल में नवादा लोकसभा से दो बार भाजपा तो एक बार लोजपा के सांसद रहे हैं। नदी के इस पार रजौली बाजार और नदी के उस पार रजौली पश्चिमी पंचायत के डीह रजौली के दर्जनों मतदाताओं ने बताया कि 15 वर्षों पूर्व जब भाजपा के टिकट से भोला सिंह वर्ष 2009 में लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद भवन गए थे तो सांसद बनने के बाद उन्होंने क्षेत्र के मतदाताओं को आश्वासन दिया था कि जल्द ही इस धनार्जय नदी पर पुल का निर्माण होगा। पुल निर्माण के लिए लोगों के द्वारा आवेदन दिए जाने के बाद कागजी प्रक्रिया आगे भी बढ़ी। लेकिन सांसद भोला सिंह के 5 वर्षों के कार्यकाल में इस नदी पर पुल का निर्माण नहीं हो सका। वर्ष 2009 के बाद 2014 में बेगूसराय से चुनाव लड़ने वाले गिरिराज सिंह को नवादा लोकसभा से भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ने का मौका मिला। इस बार भी रजौली के मतदाताओं ने भाजपा नेता गिरिराज सिंह को वोट देकर भारी मतों से चुनाव जितवाकर संसद भवन भिजवाया। लेकिन सांसद गिरिराज सिंह के समय में भी नदी पर पुल का निर्माण नहीं हो सका। सांसद गिरिराज का भी कार्यकाल बीत गया और लोगों की उम्मीदें पूरी नहीं हुई। 

इसके बाद वर्ष 2014 में एनडीए के घटक दल लोजपा के टिकट पर नवादा लोकसभा सीट से मोकामा के सूरजभान सिंह के भाई चंदन सिंह नवादा के सांसद बने। लेकिन 5 वर्षों के उनके कार्यकाल में भी धनार्जय नदी पर पुल का निर्माण नहीं हो सका। जिसके बाद विगत 15 वर्षों से रजौली बाजार अब नगर पंचायत रजौली, रजौली पश्चिमी, रजौली पूर्वी पंचायत के मतदाता अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। क्योंकि हर बार मतदाताओं को चुनाव लड़ने के लिए आने वाले अभ्यर्थियों ने केवल आश्वासन ही दिया है किसी ने पुल बनवाने की दिशा में कारगर कदम उठाने की कोशिशें नहीं की। मतदाताओं का आरोप है कि अगर 15 वर्षों के एनडीए के कार्यकाल में किसी भी सांसद ने अगर मतदाताओं के विकास को ध्यान में रखा होता तो संभवतः धनार्जय नदी पर पुल का निर्माण हो गया होता और वर्षों से लोगों का नदी पर पुल बनवाने का अधूरा अरमान पुल का निर्माण होने से पूरा हो जाता। इस बार भी इस क्षेत्र के मतदाता इस पुल का निर्माण होने की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठे हैं कि एक बार फिर नवादा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार क्षेत्र में मतदाताओं से वोट मांगने के लिए जनसंपर्क करने के लिए आएंगे और उनके अधूरे अरमान को पूरा करने का वादा करेंगे।

बरसात के दिनों में विद्यालय पढ़ने वाले बच्चों और किसानों को होती है काफी मुश्किलें, कट जाता है बाजार से संपर्क--जाड़े और गर्मी की बात तो छोड़िए जब बरसात का मौसम आता है तो इस क्षेत्र का हाल काफी बुरा हो जाता है। बरसात के दिनों में नदी के उस पार के दर्जनों गांवों डीह रजौली, रामपुर, नावाडीह, सरमसपुर, गरीबा, राजाबिगहा, करणपुर के ग्रामीण क्षेत्रों से रजौली के विद्यालयों में पढ़ने आने वाले बच्चों और इस क्षेत्र के सैकड़ों किसानों को अपनी धान, गेहूं और मौसमी साग-सब्जियां को बेचने के लिए रजौली बाजार आने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि धन का अर्जन करने वाली इस धनार्जय नदी में बरसात के दिनों में आने वाली बाढ़ से पानी का जलस्तर इतना बढ़ जाता है कि नदी उस पार के लोगों को नदी पार कर रजौली बाजार आना काफी जोखिम और दुष्कर कार्य होता है। हाल के वर्षों में धनार्जय नदी में कई बार भयंकर बाढ़ आई। जिससे नदी का जलस्तर लगभग 5 मीटर तक पहुंच गया और रजौली बाजार से लोगों का संपर्क टूट गया। मतदाताओं ने बताया कि नदी के उस पार दर्जन भर गांव है। इन गांवों के छोटे-छोटे बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने के लिए रजौली आना पड़ता है तो वहीं किसानों को अपनी साग-सब्जियों को बेचने के लिए रजौली बाजार आना पड़ता है। लेकिन जब नदी में भयंकर बाढ़ आती है तो इन लोगों को लगभग 4 से 5 किलोमीटर घूम कर दूसरे रास्ते से सिमरकोल होकर रजौली आना पड़ता है। जिससे इन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों का नुकसान होता है। हालांकि कई बार भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी इस धनार्जय नदी पर पुल का निर्माण कराने की कोशिश की। लेकिन आश्वासन मिलने के सिवा आज तक कुछ नहीं मिला।

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