शिद्दत से याद किये गए भगवान परशुराम, की गयी पूजा अर्चना

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शिद्दत से याद किये गए भगवान परशुराम, की गयी पूजा अर्चना


नवादा (रवीन्द्र नाथ भैया)
नगर के सृष्टि संगीत महाविद्यालय के तत्वाधान में कार्यकारी महासचिव सह कोषाध्यक्ष पाण्डेय अभिमन्यु कुमार की अध्यक्षता में परशुराम जयंती आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुरुआत वैदिक मंत्रों के साथ दीप प्रज्वलन कर किया गया। 

इस अवसर पर कार्यकारी महासचिव पाण्डेय अभिमन्यु कुमार ने कहा कि बैशाख शुक्ल पक्ष अक्षय तृतीया अंग्रेजी तारीख़ 10 मई 2024 दिन शुक्रवार को भगवान विष्णु के छठे अवतार, पितृभक्त , शैव संस्कृति के समुपासक व शक्तिधर भगवान परशुराम जी का जन्मोत्सव है!  

परशुराम जी त्रेता युग (रामायण काल) में एक ब्राह्मण ऋषि के यहाँ जन्मे थे।  पौरोणिक वृत्तान्तों के अनुसार इनका जन्म महर्षि भृगु के पुत्र महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को मध्यप्रदेश के इन्दौर जिला में ग्राम मानपुर के जानापाव पर्वत में हुआ है । बहुत से लोग जयंती कहते हैं पर मेरी राय में " जन्मोत्सव " कहना उचित होगा। 

इस अवसर पर संस्थान के वर्किंग कमिटी सदस्य पाण्डेय अमरेन्द्र कुमार  ने कहा परशुराम जी की जीवनशैली सर्वकालिक प्रासंगिक है। उनकी जीवनशैली ही उनके विचार हैं जो उनकी तरह ही अजर - अमर और समाज के लिए सर्वथा अनुकरणीय है। एक हाथ में शस्त्र और दूजे हाथ में शास्त्र की उनकी प्रचलित छवि समाज को यही अकाट्य सन्देश देती है कि अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष के लिए शस्त्र जितना जरूरी है उतनी ही जरूरी शास्त्र अर्थात ज्ञान है। कहने का तात्पर्य यह कि शास्त्रीय संघर्ष से ही हम तमाम प्रकार की बुरी शक्तियों और बुराइयों को परास्त कर सकते हैं। भगवान परशुराम का आदर्श चरित्र प्रत्येक युग और देश में सदा प्रासंगिक है। वे यथार्थ की कठोर प्रस्तर शिला पर सुप्रतिष्ठित हैं और मानव मन की फूल से भी कोमल तथा वज्र से भी कठोर-‘वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि’ अन्तः वृत्तियों के संवाहक हैं।

इस अवसर पर नृत्य प्रशिक्षक चंदन कुमार,शिवम कुमार,सौरव निशांत,अनुप्रिया सहित कई अभिभावक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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