'10 सालों में नहीं मिली सफलता तो ले लीजिए एक ब्रेक', प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी को दी सलाह

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'10 सालों में नहीं मिली सफलता तो ले लीजिए एक ब्रेक', प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी को दी सलाह

 


लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन की रणनीति पर सवाल उठाया है. इस दौरान उन्होंने यह भी दावा किया कि बीजेपी दक्षिण के राज्यों में अच्छा प्रदर्शन करेगी और ज्यादा सीट जीतेगी.

'सिर्फ वायनाड जीतने से कुछ नहीं होगा'

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "आपकी लड़ाई उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में है, लेकिन आप मणिपुर और मेघालय का दौरा कर रहे हैं. ऐसे में आपको सफलता कैसे मिलेगी. अगर आप यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश में नहीं जीते तो वायनाड से जीतने से कोई फायदा नहीं होगा. अमेठी चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय गलत साबित होगा, इससे गलत संदेश जाएगा."

'राहुल गांधी को नहीं मिली है कोई सफलता'

प्रशांत किशोर ने कहा, "राहुल गांधी पिछले 10 साल से पार्टी के लिए रिजल्ट लाने में असमर्थ साबित हुए हैं. इसके बावजूद वे न तो दूसरों को मौका दे रहे हैं और न ही खुद हट रहे हैं. जब आप पिछले 10 साल से एक ही काम कर रहे हैं और उसमें कोई सफलता नहीं मिली है, तो ब्रेक लेने में कोई बुराई नहीं है. उन्हें अगले पांच साल के लिए यह काम किसी और को करने देना चाहिए."

इस दौरान उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "दुनिया भर में अच्छे नेताओं की एक बड़ी विशेषता यह है कि वे जानते हैं कि उनके पास क्या कमी है और वे एक्टिव होकर उन कमियों को दूर करने की दिशा में काम करते हैं, लेकिन राहुल गांधी को ऐसा लगता है कि वह सब कुछ जानते हैं. ऐसे में कोई भी आपकी मदद नहीं कर सकता है. अगर इस लोकसभा चुनाव में मनमुताबिक रिजल्ट नहीं मिले तो राहुल गांधी को हट जाना चाहिए और दूसरे नेताओं को काम करने देना चाहिए."

अखिलेश और तेजस्वी यादव पर भी उठाए सवाल

प्रशांत किशोर ने आरोप लगाते हुए कहा, "कांग्रेस के कई नेता निजी तौर पर स्वीकार करेंगे कि वे पार्टी में कोई निर्णय नहीं ले सकते हैं. यहां तक गठबंधन के सहयोगियों के साथ सीट बंटवारे को लेकर जब तक किसी खास से मंजूरी नहीं मिल जाती तब तक कोई फैसला नहीं होता है. उन्होंने कहा, चाहे वह राहुल गांधी हों, अखिलेश यादव हों या तेजस्वी यादव हों उनकी पार्टी ने भले ही उन्हें अपना नेता स्वीकार कर लिया हो, लेकिन जनता ने उन्हें स्वीकार नहीं किया. उन्होंने पूछा कि क्या अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी को जीत दिलाने में सक्षम हैं?"

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