तृतीय विश्व युद्ध की तरफ क्यों बढ़ रही है दुनिया?TRITIY VISHYUDH

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तृतीय विश्व युद्ध की तरफ क्यों बढ़ रही है दुनिया?TRITIY VISHYUDH


 क्या दुनिया तृतीय विश्व युद्ध की तरफ बढ़ रही है? इजरायल और ईरान के बीच जारी तनातनी ने इसकी चर्चाएं तेज कर दी है. 79 साल बाद विश्व युद्ध को लेकर हुई इस चर्चा के 3 अहम कारण भी हैं. 

पहला कारण मिडिल-ईस्ट और यूरोप का पूरी तरह अशांत होना है. दूसरा कारण यूएन का फेल्योर होना, जबकि तीसरा और अहम कारण युद्ध में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो चुके अधिकांश बड़े देश हैं.


1945 में आखिरी बार दुनिया में विश्व युद्ध लड़ा गया था. इस युद्ध में करीब 6 करोड़ लोग मारे गए थे. 


पहले जानिए ईरान और इजरायल के बीच क्या विवाद है?

इजरायल अक्सर ईरान पर प्रॉक्सी वार का आरोप लगाता है. अक्टूबर में जब हमास ने इजरायल पर हमला किया तो इजरायल ने इसके पीछे भी ईरान को ही वजह बताया. 

दोनों के बीच ताजा विवाद 1 अप्रैल को हुए एबेंसी पर एयरस्ट्राइक है. इस दिन सीरिया में ईरानी एंबेसी के पास इजराइली सेना ने एयरस्ट्राइक की थी. इसमें ईरान के दो टॉप आर्मी कमांडर्स समेत 13 लोग मारे गए थे.


ईरान इसके बाद से ही फायर है. सीबीसी न्यूज के मुताबिक ईरान सीधे तौर पर अब इजरायल पर हमला करने की तैयारी कर रहा है.


अब 3 पॉइंट्स में समझिए विश्व युद्ध की तरफ क्यों बढ़ रही है दुनिया?

1. यूरोप और मिडिल-ईस्ट में जंग, एशिया भी शांत नहीं


रूस और यूक्रेन में फरवरी 2022 से ही जंग जारी है. दोनों देश यूरोप का हिस्सा है. इस जंग में यूक्रेन के 10 से ज्यादा शहर बर्बाद हो चुके हैं. यूनाइटेड नेशन के मुताबिक युद्ध में यूक्रेन के 600 बच्चों सहित 10,810 नागरिक अब तक मारे जा चुके हैं. 

यूक्रेन के स्थानीय अखबार कीव इंडिपेंडेंट के मुताबिक जंग में रूस के 45 हजार से ज्यादा सैनिकों की भी मौत हुई है. मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक दोनों देशों के बीच जंग की वजह से लाखों लोगों को अपना घर छोड़ विस्थापित होना पड़ा है. 


यूक्रेन और रूस की वजह से पूरा यूरोप अस्त-व्यस्त है.


यूरोप में जारी जंग के बीच मिडिल-ईस्ट भी सुलगने लगा है. मिडिल-ईस्ट के गजा और इजरायल के बीच 6 महीने से ज्यादा वक्त से युद्ध चल रहा है.

इस युद्ध में अब तक 35 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इन दोनों देशों के बीच युद्ध की वजह से ईरान भी इजरायल के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है. अगर ईरान और इजरायल के बीच जंग होता है, तो इसमें मिडिल-ईस्ट के कई देश शामिल हो सकते हैं.

हालात एशिया की भी ठीक नहीं हैं. यहां भारत का चीन और पाकिस्तान से सीमा विवाद चल रहा है. हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन से सीमा विवाद को लेकर बयान दिया था. पीएम मोदी ने कहा था कि इस पर जल्द ध्यान देने की जरूरत है. 


पाकिस्तान का अफगानिस्तान से भी सीमा का विवाद चल रहा है. इसकी वजह से दोनों देशों में कई बार झड़प भी हो चुकी है. 

2. यूएन की अपील असरदार नहीं, जंग रोकने में अब तक फेल 


संयुक्त राष्ट्र संघ की अपील अब तक किसी भी जंग को रोकने में असरदार साबित हुआ है. यूएन रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास दोनों से शांति कायम करने की अपील कर चुका है, लेकिन कोई भी उसकी बात सुनने को तैयार नहीं है. 

कहा जा रहा है कि द्वितीय विश्वयुद्ध से पहले राष्ट्रसंघ की जो स्थिति थी, वर्तमान में वही स्थिति संयुक्त राष्ट्र संघ की है. उस वक्त भी राष्ट्रसंघ की युद्ध रोकने की अपील किसी देश ने नहीं सुनी थी.

जानकारों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के फंक्शन में शुरूआत से ही दिक्कतें रही हैं, लेकिन वर्तमान में जो हालात बन हैं उसने इसकी नाकामी को और ज्यादा उजागर कर दिया है.


संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्व महासचिव बुतरस बुतरस घाली के मुताबिक वीटो सिस्टम ने यूएन को कमजोर कर रखा है. वे अपने ऑटोबायोग्राफी  में लिखते हैं- अगर वीटो सिस्टम खत्म नहीं हुआ, तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद स्वतंत्र होकर काम नहीं कर सकेगी.

वर्तमान में 5 देशों के पास वीटो पावर है और युद्ध रोकने को लेकर जब भी यूएन कोई मीटिंग बुलाता है, तो इनमें से कोई न कोई देश वीटो लगा देता है और बैठक महत्वविहीन हो जाता है.

3. बड़े देश इस बार भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जंग में शामिल


द्वितीय विश्वयुद्ध में जो देश प्रमुख रूप से शामिल थे, वो इस बार भी पनपे जंग में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं. इसे 3 उदाहरण से समझिए-

द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली और रूस जैसे देश प्रमुख रूप से शामिल थे. इस बार भी ये देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी न किसी जंग में शामिल हैं. अमेरिका मिडिल ईस्ट की लड़ाई में इजरायल के साथ है, तो रूस-यूक्रेन के जंग में यूक्रेन के साथ.


मिडिल-ईस्ट के इजरायल और ईरान सीधे तौर पर जंग में शामिल हैं, जबकि यहां के कई अन्य देश एक-दूसरे के पीछे खड़े हैं.


एशियाई और अफ्रीकी देशों को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है. हालांकि, चीन यूक्रेन और रूस जंग में अब तक रूस का ही साथ देता रहा है. ताइवान के मुद्दे पर चीन का अमेरिका से गहरे मतभेद हैं. वहीं भारत का रवैया तटस्थ रहा है. 

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