मुसलमानों को नसीहत! क्या प्रशांत किशोर बना रहे हैं बिहार फतह की रणनीति?

👉

मुसलमानों को नसीहत! क्या प्रशांत किशोर बना रहे हैं बिहार फतह की रणनीति?

 


आम चुनावों की बेला में बिहार से दूर दिल्ली में चुनावी रणनीतिकार और जनसुराज के मुखिया प्रशांत किशोर के लिए एक महफिल सजाई गई. जिसे शाहीनबाग-अबुल फजल इनक्लेव में बरपा की गई. इसके लिए रमज़ान का महीना और इफ्तार का वक्त चुना गया. इस चुनावीनुमा महफिल को ‘मशविरा’ का नाम दिया गया और विषय रखा गया- ‘जम्हूरियत में कयादत की जरूरत’. 

इफ्तारी और नमाज के बाद प्रशांत किशोर जब महफिल में नमूदार हुए तो सबकी नजर उनके लिबास पर गई जो अपने गले में अरबी रुमाल (कुफिया) बांधे हुए थे. रिवायती तौर पर मुसलमान अपने मजहबी रस्म व त्योहार के मौके पर इस तरह का लिबास ज़ेबतन (पहन) करते हैं. 

जब प्रशांत किशोर ने अपनी बात की शुरुआत की तो सबसे पहले अपना परिचय दिया. मैं वही प्रशांत किशोर हूं, जिसने 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी को जीत दिलवाने की रणनीति बनाई...

मुसलमानों से प्रशांत किशोर क्या कह रहे हैं?

प्रशांत किशोर ने जब अपनी बात रखनी शुरू की तो एक नेता या रणनीतिकार की तरह भाषणबाज़ी नहीं की, बल्की एक नासेह (नसीहत देने वाले) की तरह मुसलमानों की कमजोरियों को गिनाया और उसे दूर करने का तिलस्मतानी लेकिन कड़वा नुस्खा पेश किया.

उन्होंने मुसलमानों को सियासी तौर पर बंधुआ मजदूर बन जाने को लेकर जमकर फटकार लगाई और इसके लिए मुसलमानों को दोषी करार दिया. प्रशांत किशोर ने कहा कि मुसलमान अपनी क़यादत (लीडरशिप) खड़ी करने के बजाए सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी, बीजेपी को हराने की बात करते हैं. 

उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस दिन मुसलमान अपनी लीडरशिप खड़ी करने को लेकर फिक्रमंद हो जाएं और नरेंद्र मोदी, बीजेपी को हराने के बजाए खुद को जिताने की सोच पर आगे बढ़ जाएँगे. अगले पांच से 10 साल में हालात बदल जाएंगे.

अपनी खरी खोटी को जारी रखते हुए प्रशांत किशोर ने मुसलमानों को लताड़ते हुए अंदाज़ में कहा कि जब तक आप अपने बच्चों को सियासत में नहीं भेजेंगे, सूरत बदलने वाली नहीं हैं. 

प्रशांत किशोर ने बिहार के पंचायत चुनाव में मुस्लिम नुमाइंदगी का डेटा पेश करते हुए कहा कि जहां मुसलमानों के 16 हज़ार मुखिया होने चाहिए, वहां उनकी तादाद 11 हजार है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार में मुसलमान वार्ड सदस्य भी अपनी संख्या से बहुत कम हैं. 

यानी राजनीतिक सलाहियत के मामले में मुसलमान सिर्फ विधानसभाओं या संसद में ही नहीं, स्थानीय चुनाव यानी ज़मीन पर भी फिसड्डी है.

बीजेपी को हराने का पीके के पास प्लान क्या है?

मुसलमानों को नसीहत देने के साथ ही प्रशांत किशोर ने मौजूदा सियासत पर भी अपनी टिप्पणी की. उन्होंने बीजेपी के खिलाफ मौजूदा महागठजोड़ की रणनीति को फ्लॉप करार दिया. 

उनका तर्क है कि इस वक्त भारत में चार किस्म के लोग हैं जो बीजेपी को वोट नहीं कर रहे हैं. 1. गांधीवादी 2. कम्युनिस्ट 3. जेपी-लोहिया समाजवादी और 4. अंबेडकरवादी. 

प्रशांत किशोर का तर्क था कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कुल 38 फीसदी वोट मिले. यानी अल्पसंख्यकों की 20 फीसदी आबादी को हटा दें तो हिंदुओं की कुल आबादी 80 फीसदी में से 42 फीसदी ने वोट नहीं किया. 

प्रशांत किशोर इन आंकड़ों की बिसात पर दावा करते हैं कि बीजेपी को हराया जा सकता है, लेकिन उनका तर्क है कि इसके लिए एंटी बीजेपी एप्रोच नहीं अपनाना चाहिए, बल्कि किसी को हराना नहीं बल्कि खुद को जीतना है- इस रणनीति पर काम करना चाहिए. 

प्रशांत किशोर की हकीकत से भरी इन मीठी-मीठी बातों से महफिल का माहौल खुशगवार दिखा. एक शख्स ने तो प्रशांत किशोर को भरी महफिल में जमकर सैल्यूट किया. एक मसीहा के तौर पर उन्हें पेश किया. हालांकि, पीके इन सबसे खुद को मुक्त दिखाने की भरपूर कोशिश करते दिखे. 

जहां लोग प्रशांत किशोर की खरी-खरी और सच्ची बातों से सहमत दिखे, वहीं कुछ उनकी अचानक पैदा हुई मसीहाई पर यकीन करने को तैयार न दिखे. कइयों के सवाल थे कि आखिर प्रशांत किशोर मुसलमानों को उनकी कमी क्यों याद दिला रहे हैं. उन्हें वो भूला सबक क्यों पढ़ा रहे हैं जो उनके पैगंबर मोहम्मद साहब बताकर गए.

अब सवाल- पीके को अचानक मुसलमानों की याद क्यों आई?

पूर्व राज्यसभा सांसद और ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के मुखिया अली अनवर कहते हैं- बीजेपी के मजबूत होने के बाद मुसलमानों में डर और छटपटाहट का माहौल है. पिछले कुछ सालों से इस डर और छटपटाहट का फायदा कई लोग उठाने में लगे हैं.


अली अनवर के मुताबिक प्रशांत भी मुसलमानों को नसीहत देकर उसे साधने की कोशिश में जुटे हुए हैं. उनका मुख्य लक्ष्य मुस्लिम युवा हैं. 

Post a Comment

Previous Post Next Post